वसंत पंचमी मूलरूप से प्रकृति का उत्सव है। इसे आनंद का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन से धार्मिक, प्राकृतिक और सामाजिक जीवन के कामों में बदलाव आने लगता है। लेकिन सिर्फ़ प्रकृति का ही नहीं, यह आध्यात्मिक दृष्टि से अपने को समझने, नए संकल्प लेने और उसके लिए साधना आरंभ करने का पर्व भी है।
भारत में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा का दिन माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसा मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य की झोली में आई थी। हिंदू धर्म में देवी शक्ति के जो तीन रूप हैं -काली, लक्ष्मी और सरस्वती, इनमें से सरस्वती वाणी और अभिव्यक्ति की अधिष्ठात्री हैं।
सृष्टि का कामकाज मूक होकर नहीं हो सकता था। इसलिए कहते हैं कि ब्रह्मा ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का। इस जल से हाथ में वीणा धारण किए जो शक्ति


