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Sunday, 29 January 2012

वसंत पंचमी-साधना का संकल्प लेने का दिन

वसंत पंचमी मूलरूप से प्रकृति का उत्सव है। इसे आनंद का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन से धार्मिक, प्राकृतिक और सामाजिक जीवन के कामों में बदलाव आने लगता है। लेकिन सिर्फ़ प्रकृति का ही नहीं, यह आध्यात्मिक दृष्टि से अपने को समझने, नए संकल्प लेने और उसके लिए साधना आरंभ करने का पर्व भी है।
भारत में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा का दिन माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसा मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य की झोली में आई थी। हिंदू धर्म में देवी शक्ति के जो तीन रूप हैं -काली, लक्ष्मी और सरस्वती, इनमें से सरस्वती वाणी और अभिव्यक्ति की अधिष्ठात्री हैं।
सृष्टि का कामकाज मूक होकर नहीं हो सकता था। इसलिए कहते हैं कि ब्रह्मा ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का। इस जल से हाथ में वीणा धारण किए जो शक्ति

Vasant Panchami:Birthday of Goddess of Saraswati

As ‘Diwali’ – the festival of light – is to Lakshmi, goddess of wealth and prosperity, and ‘Navaratri’ is to Durga, goddess of power and valor, Vasant Panchami is to Saraswati, the goddess of knowledge and arts. This festival is celebrated every year on the 5th day or ‘Panchami’ of the bright fortnight of the lunar month of Magha, which falls during January-February, (see calendar). ‘Vasant’ comes from the word ‘spring’ as this festival heralds the beginning of the spring season.
Birthday of Goddess Saraswati:
It is believed that on this day goddess Saraswati was born. Hindus celebrate Vasant Panchami with great fervor in temples, homes and even schools and colleges. Saraswati’s favorite color white assumes special significance on this day. Statues of the goddess are

वसंत पंचमी: सरस्वती आराधना का दिन

बसंत यानी सृजनात्मकता : वसंत पंचमी यानी ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती की आराधना का दिन। बसंत पंचमी पर हर साधक ना सिर्फ देवी की आराधना करता है बल्कि यह दिन कई मायनों में हर कलाकार के लिए खास होता है। कहीं पर कलाकार अपने वाद्य यंत्रों की पूजा-अर्चना करते हैं तो कहीं साधकों द्वारा पहले से ज्यादा अभ्यास और समर्पण के प्रण लिए जाते हैं।

संगीत ईश्वरीय देन है : संगीत, उसका एहसास और उसकी साधना ईश्वरीय देन है। हर साधक के लिए वसंत पंचमी का दिन एक नई ऊर्जा लेकर आता है लिहाजा इसका इंतजार सभी को रहता है। जलज संगीत समूह के निदेशक तबला वादक शचींद्र अग्रवाल बताते हैं- संगीत से आत्मीय जु़ड़ाव होने के कारण मैं तबला बजाता हूँ। हर साधना की शुरूआत धीमी और कठिन होती है। लिहाजा डरने की बजाय ज्यादा से ज्यादा मेहनत की जरूरत होती है।