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Friday, 24 February 2012

भारत के इस्लामीकरण का खतरा

अभी कुछ दिनों पूर्व जब मैंने अपने एक मित्र और नवसृजित राजनीतिक आन्दोलन युवादल के राष्ट्रीय संयोजक विनय कुमार सिंह के साथ पश्चिम बंगाल की यात्रा की तो भारत पर मँडरा रहे एक बडे खतरे से सामना हुआ और यह खतरा है भारत के इस्लामीकरण का खतरा। पश्चिम बंगाल की हमारी यात्रा का प्रयोजन हिन्दू संहति के नेता तपन घोष सहित उन 15 लोगों से मिलना था जिन्हें 12 जून को हिन्दू संहति की कार्यशाला पर हुए मुस्लिम आक्रमण के बाद हिरासत में ले लिया गया था। तपन घोष को गंगासागर और कोलकाता के मध्य डायमण्ड हार्बर नामक स्थान पर जेल में रखा गया था। हम अपने मित्र के साथ 23 जून को कोलकाता पहुँचे और दोपहर में पहुँचने के कारण उस दिन तपन घोष से मिलने का कार्यक्रम नहीं बन सका और हमें अगली सुबह की प्रतीक्षा करनी पडी। अगले दिन प्रातः काल ही हमने सियालदह से लोकल ट्रेन पकडी और डायमण्ड हार्बर के लिये रवाना हो गये। कोई दो घण्टे की यात्रा के उपरांत हम अपने गंतव्य पर पहुँचे और जेल में तपन घोष सहित सभी लोगों

Sunday, 5 February 2012

कट्टरता के समक्ष समर्पण

यह प्रश्न तसलीमा नसरीन ने भारतीय नेताओं, बुद्धिजीवियों से पूछा है। तस्लीमा की आत्मकथा निर्वासन का विमोचन समारोह कोलकाता पुस्तक मेले में रद कर दिया गया, क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों ने विरोध किया। पुस्तक अभी सामने भी नहीं आई, पढ़ना तो दूर रहा। लेखिका भी कार्यक्रम में उपस्थित न रहने वाली थीं। फिर भी कट्टरपंथियों को मेले में उसके विमोचन पर आपत्ति थी। उनकी धमकी के बाद अधिकारियों ने कार्यक्रम रद कर दिया। इसी पर तसलीमा ने भारतवासियों से पूछा है कि मजहबी कट्टरपंथियों से कितने समय तक डरेंगे?
यह प्रश्न हमारे दो महापुरुषों की उक्ति भी याद दिलाता है। पहली श्रीअरविंद की, जब उन्होंने सौ वर्ष पहले (4 सितंबर 1909) उसी बंगाल में विविध मुस्लिम आपत्तियों और उन्हें संतुष्ट करने के प्रयासों पर कहा था कि प्रत्येक ऐसा कार्य जिस पर कुछ मुसलमानों को आपत्ति हो अब वर्जित कर दिया जा सकता है, क्योंकि उससे शांति भंग हो सकती है और कुछ-कुछ ऐसा लगने लगा है कि कहीं वह दिन न आ जाए जब इसी तर्कसंगत आधार पर हिंदू मंदिरों में पूजा करना भी वर्जित कर दिया जाए। दूसरा कथन 1946 में डॉ. अंबेडकर का था कि मुसलमानों की मांगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं।
इन दोनों कथनों के साथ तसलीमा के प्रश्न को जोड़कर देखने-समझने की आवश्यकता है। यदि तसलीमा की बात में

Wednesday, 1 February 2012

क्या पश्चिम बंगाल में हनुमान जी की मूर्ति पर प्रतिबन्ध है ?


कोलकाता में बजबज इलाके के चिंगरीपोटा क्षेत्र में रहने वाले एक व्यवसायी श्री प्रशान्त दास ने अपने घर की बाउंड्रीवाल के प्रवेश द्वार पर बजरंग बली की मूर्ति लगा रखी है। 14 अगस्त की रात को बजबज पुलिस स्टेशन के प्रभारी राजीव शर्मा इनके घर आये और इन्हें वह मूर्ति तुरन्त हटाने के लिये धमकाया। पुलिस अफ़सर ने यह कृत्य बिना किसी नोटिस अथवा किसी आधिकारिक रिपोर्ट या अदालत के निर्देश के बिना मनमानी से किया। 

पुलिस अफ़सर का कहना है कि उनके मुख्य द्वार पर लगी बजरंग बली की मूर्ति से वहाँ नमाज़ पढ़ने वाले मुस्लिमों की भावनाएं आहत होती हैं। पुलिस अफ़सर ने उन्हें “समझाया”(?) कि या तो वह बजरंग बली की मूर्ति का चेहरा घर के अन्दर की तरफ़ कर लें या फ़िर उसे हटा ही लें। स्थानीय मुसलमानों ने (मौखिक) शिकायत की है कि नमाज़ पढ़ते समय इस हिन्दू भगवान की मूर्ति को देखने से उनका ध्यान भंग होता है और यह गैर-इस्लामिक भी है। 

उल्लेखनीय है कि उक्त मस्जिद प्रशान्त दास के मकान के पास स्थित प्लॉट पर

Sunday, 29 January 2012

Akbaruddin Owaisi, MLA of ‘MIM’, planning to convert Bharat into ‘Islamistan’

Akbaruddin Owaisi, MLA of ‘MIM’ , a party which is planning to convert Bharat into ‘Islamistan’ spits venom says, ban should be imposed on processions taken out on ‘Ram-Navami’ and ‘Hanuman Jayanti’

Bhagyanagar (Hyderabad) : MLA Akbaruddin Owaisi of ‘MIM (Majalis Ittehadul Muslimin)’, a Muslim organization, has demanded to impose ban on processions taken out on Hindu festivals viz. ‘Ram-Navami’ and ‘Hanuman-Jayanti’. Hindu organizations are angered due to such demand by Owaisi. (In a country where Hindus are in majority, a Muslim MLA, demanding ban on processions taken out during Hindu festivals, indicates that Hindus are staying in Pakistan and not in India. Today, Muslims are demanding ban on Hindu

Thursday, 19 January 2012

कश्मीरी पंडितों का विस्थापन दिवस

22 साल हो गए जब कश्यप ऋषि की तपोभूमि जो उस समय धरती का स्वर्ग हुआ करती थी, वहाँ से जेहादी जानवर मुल्लों ने कश्यप ऋषि की संतानों कश्मीरी पंडितों को बेदखल कर दिया और धरती का वो स्वर्ग दो पाँव के जेहादी जानवरों ने नरक बना दिया |

19 जनवरी 1990 – ये वही काली तारीख है जब लाखों कश्मीरी हिंदुओं को अपनी जन्मभूमि, कर्मभूमि, अपना घर हमेशा के लिए छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी होना पड़ा | वे आज भी शरणार्थी हैं | उन्हें वहाँ से भागने के लिए मजबूर करने वाले जेहादी शैतान मुल्ले भी कहने को भारत के ही नागरिक थे और आज भी हैं | उन कश्मीरी शैतानी इस्लामिक आतंकवादियों को वोट डालने का अधिकार भी है, पर इन हिंदू शरणार्थियों को वो भी नहीं |

Kashmiri Pandit’s Exile Day

Today marks 23 years of exile for Kashmiri Pandits out of their homeland. What were their crime for which they were compelled to flee out of their own Matribhmi, Pitubhumi, Punyabhumi ? Their crime was that they were the inheritors of the real ‘Kashmiriat’ which started from Shankaracharya Mandir, flew through Jhelum going till the feet of Maa Ksher Bhawani. But what happened when the propagators of the ‘religion of Peace’ reached there ?

They were expelled from thier own motherland.

Their saffron fields were set on fire.

Their properties were looted.

Their Women were brutally raped and assaulted.

There were slogans everywhere.

Three taped slogans were repeatedly played the whole night from mosques:
“Kashmir mei agar rehna hai, Allah-O-Akbar kehna hai” (If you want to stay in Kashmir, you have to say Allah-O-Akbar);
“Yahan kya chalega, Nizam-e-Mustafa” (What do we want here? Rule of Islam);
“Asi gachchi Pakistan, Batao roas te Batanev san” (We want Pakistan along with Hindu women but without their men).
Can their voices be muted forever. Aren’t they citizens of World’s largest demoracy ? They re living in refugee camps in their own country in highly inhuman conditions .Aren’t we answerable to them ?
Kashmir is incomplete withoot it’s original inhabitants, without Kashmiri Pandits.
(by Rahul Kaushik)

Monday, 26 December 2011

Muslims attack on a Hindu Temple in Denmark, डेन्मार्क स्थित हरे कृष्ण मंदिर पर मुसलमानों द्वारा आक्रमण

हिंदुओ, सामर्थ्यशाली हिंदुत्ववादी संगठन एवं मुसलमानों की दास्यता करने में स्वयं को धन्य समझने वाले हिंदुद्वेषी कांग्रेसी नेता इस पर कोई कृति नहीं करेंगे । इसलिए आप ही कृतिशील हो जाएं ! हिंदुओं को पारंपरिक वेश परिधान न करने की विनती करने वाला स्थानीय प्रशासन क्या मुसलमानों को ऐसा सूचित करने का साहस दिखाएगा ?

डेन्मार्क देश ईसाई बहुसंख्यक है । इस देश में यदि हिंदुओं को अपने धर्मानुसार आचरण करना असंभव है, तो पाक, बांगलादेश, मलेशिया एवं इंडोनेशिया के समान मुसलमान बहुसंख्यक राष्ट्र में हिंदुओं की स्थिति क्या होगी, इसका हम विचार भी नहीं कर सकते । इस घटना से यह स्पष्ट होता हैं कि, हिंदुओंके लिए संपूर्ण विश्वमें एक भी सुरक्षित स्थान नहीं है । यह स्थिति परिवर्तित करने हेतु हिंदु राष्ट्र स्थापित करना अनिवार्य है ।

Thursday, 22 December 2011

भारत के इस्लामीकरण की तैयारी

जिस तरह से सारी राजनीतिक पार्टियाँ भारत में मुसलमानों के अधिकारों के प्रति चिंतित हैं उससे तो ऐसे ही लगता है कि कहीं भारत इस्लामिक देश ही घोषित न हो जाये | वैसे भी देखा जाय तो यहाँ हिन्दुओं का ही शोषण हो रहा है | क्योंकि हिन्दू शुद्र, बनिया, ब्राह्मण, जाट, गुजर, क्षत्रिय आदि मे बंटा हुआ है जबकि मुसलमान एक हैं, ईसाई एक हैं, सिक्ख एक हैं परन्तु हिन्दुओं में जातियां गिनीं ही नही जा सकती हैं | जिन हिन्दुओं को मुग़लों ने जबरदस्ती मुसलमान बनाया, आजादी के बाद भी किसी भी हिन्दू संगठन ने उनको वापिस हिन्दू बनाने की पहल नही की | किसी ने सोचा तक नहीं पहल तो बाद में ही होती | यह बात इसलिए लिखी जा रही है क्योंकि आने वाला समय हिन्दुओं के लिए अच्छा नहीं दिख रहा है | क्या हिन्दुओं की रक्षा हेतु कोई संगठन ईमानदारी से प्रयत्नशील है, राजनीति करना अलग बात है परन्तु सार्थक प्रयास करना दूसरी बात | बात मात्र दो वर्ष पहले की है जब भारत में हरिद्वार में कुम्भ चल रहा था तब लाखों की संख्या मे हिन्दू और हिन्दू संत महात्मा और हिन्दुओं की राजनीति पोषित करने वाले संगठन हरिद्वार में सक्रिय थे | ठीक उसी समय भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भगवान श्री कृष्ण और राधाजी के बारे मे एक घोर आपत्ति जनक टिप्पणी की थी परन्तु उस टिप्पणी के विरुद्ध एक भी नही बोला |